बेटियां एक अहसास हैं

 बेटियां एक अहसास हैं

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

बेटियां एक अहसास होती हैं

पास न हों, फिर भी आसपास होती हैं

बेटियां परियों का रूप होती हैं

यही लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती का स्वरूप होती हैं

ये उदासी में उदास, बीमारी में दवा व दुआ होती हैं

ख़ुशियों में चिड़ियों की चहचहाहट होती हैं

आंगन का उजाला, गुस्से पर लगाती ताला

ये वह ताकत हैं, घर को महल बना देती हैं

ये वे अक्षर हैं, इनके बिना वर्णमाला अधूरी है

कैसे कह दें, हर वक्त हैं साथ हमारे

ये तो एक लाल जोड़े में विदा होती हैं

ये ससुराल में सब कुछ झेलती हैं

फिर भी माँ-बाप से कुछ नहीं बोलती हैं

स्यानी बेटियां समझौता करके जी लेती हैं

दोनों पलड़ों को बराबर तोल देती हैं

प्यार दोनों परिवारों का मिल जाए अगर बेटियों को

तो ये बेटियां द्वार स्वर्ग के खोल देती हैं।

प्रेषिका- सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

Comments

  1. Appreciable. बहुत ही भावुक और सच्चाई से ओत प्रोत.

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  2. Absolutely Marvellous and Beautiful

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