Be positive

 व्यर्थ की बातों से यानि कचरे से अपने अवचेतन मन को मत भरो। 
Don’t fill your sub concious mind with all sorts of garbage.

तुम्हारा अवचेतन मन चेतन मन के द्वारा ग्रहण होने वाले विचारों का बहुत बड़ा भण्डार है। जो कुछ तुम देखते, सुनते, सोचते और अनुभव करते हो, वह सब स्थाई स्मृति के रूप में यहां इकट्ठा हो जाता है, लेकिन समस्यात्मक भाग यह है कि अपने विचारों और इन्द्रिय प्रभावों के साथ-साथ हम इसमें बहुत-सा भावनात्मक कचरा और नकारात्मकता जैसे घृणा, बदला, डर, क्रोध, ईर्ष्या आदि अनजाने में, लगातार और निर्दयतापूर्वक उड़ेलते रहते हैं, जो असल में हमारी बरबादी का कारण बनता है।

कई लोग हमारे पक्ष में होते हैं, तो कुछ लोग हमारे विपक्ष में भी होते हैं। जो लोग विपक्ष में होते हैं, वे लगातार हमारी बुराई करते हैं। हम कुछ भी करें, ऐसे लोग सिर्फ हमारे विरुद्ध गलत बातें ही प्रचारित करते हैं। ऐसे लोगों से बचना चाहिए। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है।

एक संत और उनका शिष्य एक गांव से दूसरे गांव लगातार यात्राएं करते थे। इस दौरान वे अलग-अलग गांवों में रुकते भी थे। संत बहुत विद्वान थे। उनके प्रवचन सुनने के लिए काफी लोग पहुंचते थे।

एक गांव में संत अपने उपदेशों की वजह से काफी प्रसिद्ध हो गए। उनके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। ये देखकर उसी गांव का एक अन्य पुजारी परेशान हो गया। उसे लगने लगा कि इस संत की वजह से मेरे भक्त कम हो जाएंगे।

असुरक्षा की वजह भावना की वजह से पुजारी ने संत का दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया। वह गांव के लोगों के सामने उस संत की बुराई करने लगा। धीरे-धीरे पुजारी के प्रभाव में आकर गांव के काफी लोग संत के लिए बुरी बातें करने लगे।

एक दिन संत के शिष्य को ये सारी बातें मालूम हुईं, तो उसे बहुत गुस्सा आ गया। वह तुरंत ही अपने गुरु के पास पहुंचा और पूरी बात बताई। संत ने शिष्य की बातें सुनी और कहा कि हमें दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमें सिर्फ अपने काम में मन लगाना चाहिए। ये बातें सुनकर भी शिष्य का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

संत ने कहा कि जब हाथी गांव में आता है, तो उसे देखकर गांव के सभी कुत्ते भौंकने लगते हैं, लेकिन हाथी पर इसका कोई असर नहीं होता है। हाथी अपनी मस्त चाल चलता रहता है। हमें भी बुराई करने वाले लोगों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमें सिर्फ अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए और अपने लक्ष्य की और बढ़ते रहना चाहिए। हमारे अच्छे काम ही ऐसे लोगों का मुंह बंद कर सकते हैं।

हर समय यदि तुम नकारात्मक विचार सोचोगे, तो उसी समय वे तुम्हारे अवचेतन मन में चले जायंगे। चाहे तुम उस के बारे में जान पाओ या नहीं पर उसके प्रभाव में कोई फ़र्क नहीं आता। जो कुछ तुमने अपने अवचेतन मन को ग्रहण करवाया है, वह उसी रूप में तुम पर प्रतिक्रिया करेगा। इसलिए ये सभी नकारात्मक प्रभाव और भावनायं जो यहां भरी गई हैं, वे प्रतिक्रिया करेंगी और तुम्हारे चेतन मन में आवेगों, उत्तेजनाओं और रोष के रूप में लहरें उत्पन्न करके उसे बेचैन बना देंगी। 

रात के समय डरावने स्वप्न देखना अवचेतन मन की नकारात्मक, असावमान और विचारहीन भावनाओं का परिणाम है।

अब इससे बाहर आने का मार्ग क्या है? तुम्हें अपने अवचेतन मन को इसी समय मज़बूत और सकारात्मक विचारों और भावनाओं से भरना शुरू कर देना चाहिए। यह धीरे-धीरे तुम्हारे अवचेतन मन की नकारात्मकताओं व अशुद्धियों को नष्ट कर देगा। याद रखो सकारात्मक हमेशा नकारात्मक पर विजयी होता है। 

इसके लिए तुम्हारे चेतन मन को, प्रत्येक विचार जो यह सोचता है, उसके प्रति जागरूक और सावधान रहना पड़ेगा और केवल सकारात्मक विचारों को प्रवेश करने की अनुमति देनी पड़ेगी। इस कार्य को सफलतापूर्वक करने से तुम्हें इनमें छिपा हुआ सबक मिलेगा। तुम्हें हर घटना, समस्या, विपत्ति और दुर्भाग्य के प्रति सकारात्मक रुख अपनाना पड़ेगा।

इसके अतिरिक्त विभिन्न सांसारिक बातों और परिस्थितियों के प्रति अपनी भावनात्मक सीमाओं और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करो। उन के प्रति तुम्हारी प्रतिक्रियाएं जितनी निराशाजनक होंगी, उतना ही तुम्हारे अवचेतन मन पर पड़ने वाले प्रभाव नकारात्मक होंगे और उसी प्रभाव के कारण तुम्हारे अवचेतन मन में पैदा होने वाले उपद्रव कष्टदायक होंगे। 

हमारे दुःख का मूल कारण हमारी क्रियाएं नहीं, बल्कि प्रतिक्रियाएं हैं।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 


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