अधिकार का वरदान
मानव को कर्म के अधिकार का वरदान
ईश्वर ने मानव को ज्ञान जिज्ञासा विवेक युक्त कर्म करने का अधिकार दिया है। अच्छा और बुरा भी दिया है।
सकारात्मकता जीवन है, स्वर्ग योग है; नकारात्मक मृत्यु है, नरक है और भोग है। चुनाव आप का है।
दिन - रात
गर्मी - सर्दी
ज्ञान - अज्ञान
विश्वास - अन्धविश्वास
धर्म - अधर्म
सुख - दुःख
अच्छा - बुरा
सत्य - असत्य
सत्कर्म - दुष्कर्म
इच्छा - त्याग
जागना - सोना
हंसना - रोना
लोभ - क्रोध
सात्विक - तामसिक
रस - गन्ध
दृष्टि - शब्द
योग - भोग
राग - द्वेष
पाप - पुण्य
हिंसा - अहिंसा
सद्कर्म - कर्मकाण्ड
बेईमानी - ईमानदारी
- यह सच है कि सृष्टि की रचना की है मैंने, यह भी सच है कि हर सुविधा की व्यवस्था की है मैंने,
- कर्म करने की भरपूर स्वतंत्रता भी दी है मैंने, तेरे लिए कर्मों के फल भोगने की व्यवस्था भी की है मैंने।
इति सिद्धम्
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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