ईश्वर नहीं होता खफा
ईश्वर नहीं होता खफा
वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से
एक तुम्हीं हो, जो मुझ से न होवे खफा,
प्रभु! क्यों न करूं, मैं साथ तेरे वफा?
एक तूने ही मुझ को, लगाया गले,
ज़िन्दगी में तुम्हीं ,मेरे संग संग चले,
तूने मुझ को निकाला है, उस दौर से,
जब लगी चोट दिल को, बड़े जोर से,
हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा ...........
वक्त ऐसे ही इंसान को, आजमाता है,
आ कर तू ही ज़मी पर, उस को समझाता है,
सब से ऊँचा ही तेरा, ये किरदार है,
जिस ने समझा तुझे, वो समझदार है,
खुद को जोड़ा जो तुम से, मिली है शफा,
हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा ........
मुझ को मालूम है, तुम में है ताकत बड़ी,
आज दुनिया ये तेरे ही, दम पे खड़ी,
हौसला मुझ में तुम ने, गजब भर दिया,
मेरे पैरों पर मुझ को, खड़ा कर दिया,
तेरा बन के मुझ को, हुआ है नफा।
हाथ थामा है तूने, मेरा हर दफा
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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