जीवन की रेल

जीवन की  रेल 

छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की....२

  हंसना रोना जागना सोना खाेना पाना, सुख दुःख दुःख सुख 

 छुक छुक छुक छुक.......... 

1) छोटी-छोटी सी बातों से, मोटी-मोटी खबरों तक..

 ये गाड़ी ले जाएगी हमको, मां की गोद से कब्रों तक ..

सब चिल्लाते रह जाएंगे, रुक रुक रुक रुक रुक......

छुक छुक छुक छुक ...........।

2) सामां बांध के रखो लेकिन चोरों से होशियार रहो.....२

 जाने कब चलना पड़ जाए ,चलने को तैयार रहो.....२

 जाने कब सीटी बज जाए, सिग्नल जाए झुक .....

छुक छुक छुक छुक ........।

3) पाप और पुण्य की गठरी बांधे, सत्य नगर को जाना है,

जीवन नगरी छोड़ के हमको दूर सफर को जाना है.....

ये भी सोच ले हमने क्या-क्या, माल किया है बुक......

छुक छुक छुक छुक........।

4) रात और दिन इस रेल के डिब्बे, और सांसों का इंजन है ...२

उमर है  इस गाड़ी के पहिए और चिता स्टेशन है ..२

जैसे दो पटरी हों वैसे,  साथ चले सुख दुःख  ........

छुक छुक छुक छुक........।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।  


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