नर्क कहाँ है?
नर्क क्या है और कहाँ है?
अज्ञानता नरक है अन्ध विश्वास नर्क है
कर्म काण्ड, मूर्खता नर्क है
असाध्य रोग है तो नर्क है
राग है तो नर्क है
द्वेष है तो नर्क है
क्रोध लोभ है तो नर्क है
अभाव है तो नर्क है
प्रभाव है तो नर्क है
पद उपाधि का अभिमान नर्क है
उम्मीद इच्छा है तो नर्क है
अपेक्षा आकांक्षा है तो नर्क है
व्याभिचार है तो नर्क है
झूठ और बेईमानी है तो नर्क है
दुष्कर्म अत्याचार नर्क है
दृष्टि शब्द, रस, गन्ध, स्पर्श में जीना भी नर्क है
देहाभिमान, धन गुमान नर्क है
अधर्म पर चलना नर्क है
ज्ञानी आत्मज्ञानी आत्मदर्शी नहीं,
ईश्वर से दूर घोर नर्क गामी है
ईश्वर का सान्निध्य ही स्वर्ग है,
नरक की कोई अलग नगरी नहीं
अपने अन्दर नर्क है
सावधान रहें
इति सिद्धम
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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