स्वर्ग कहाँ है?

 स्वर्ग क्या है और कहाँ है?

वेद प्रकाश गावड़ी, (सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापक), हिसार की लेखनी से

सद्ज्ञान है, तो स्वर्ग है

सत्य, विश्वास है, तो स्वर्ग है

योग और निरोग है, तो स्वर्ग है

प्रेम निस्वार्थ है, तो स्वर्ग है

वैराग्य है, तो स्वर्ग है

ज़रूरत में जीना स्वर्ग है

कुछ नहीं चाहिए, तो स्वर्ग है

सम भाव में जीना स्वर्ग है

ब्रह्मचर्य है, तो स्वर्ग है

सत् कर्म, ईमानदारी ही स्वर्ग है

देह भान से परे स्वर्ग है

धर्म पर चले, तो स्वर्ग है

आत्मज्ञानी है, तो स्वर्ग है

आत्मदर्शी है, तो स्वर्ग है

परमात्म दर्शन परमानंद है

स्वर्ग की भी कोई विशेष नगरी नहीं

स्वर्ग यहीं है, अपने अन्दर है

समझ दारी से जीना ही स्वर्ग है

ईश्वर का सानिध्य ही स्वर्ग है,

ईमानदार प्रयास की आवश्यकता है

सावधान रहें 

इति सिद्धम्

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।


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