more give, more get.

 जितना ज़्यादा तुम दोगे, उतना ही ज़्यादा मिलेगा।
The more you give, the more you get.

यह एक आश्चर्यजनक दैवीय नियम है कि जो तुम दूसरों को देते हो, वह दुगुना और तिगुना हो कर तुम्हें वापिस मिलता है; चाहे वह ज्ञान हो या भौतिक वस्तुएँ। कुछ लोग ज्ञान को छिपाने की कोशिश करते हैं, ताकि अन्य लोग उनके स्तर तक न पहुँच सकें, लेकिन वास्तविकता यह है कि तुम देने से और अधिक पाओगे। अपना ज्ञान दूसरों को देने से तुम अधिक ज्ञानवान बन जाओगे। असली ख़ुशी देने में है न कि पाने में। इसलिए दूसरों को देने में उदारवादी बनो। 

जितना दोगे, उससे अधिक मिलेगा-

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत कम जमीन थी, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। जो भी उसके द्वार पर आता, वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था।

एक दिन गाँव में भीषण अकाल पड़ा। रामू के घर में भी अनाज खत्म होने वाला था। उसके पास केवल एक मुट्ठी बाजरा बचा था, जिससे वह अपने परिवार के लिए खिचड़ी बनाने वाला था। तभी उसके दरवाजे पर एक बूढ़ा और कमज़ोर साधु आया। 

साधु ने कहा, “बेटा, मैं तीन दिनों से भूखा हूँ, क्या कुछ खाने को मिलेगा?“

रामू की पत्नी घबरा गई, लेकिन रामू ने मुस्कुराते हुए वह एक मुट्ठी बाजरा साधु को दान कर दिया। उस रात रामू का परिवार भूखा सोया, लेकिन उन्हें इस बात का संतोष था कि उन्होंने किसी की मदद की।

अगली सुबह जब रामू सोकर उठा, तो उसने देखा कि उसके आंगन में लगा बाजरे का वह पौधा, जो सूख रहा था, रातों-रात मोतियों जैसे दानों से लद गया है। इतना ही नहीं, उसके अनाज के खाली डिब्बे भी अपने आप भर गए थे।

रामू समझ गया कि यह उसकी उदारता का फल है।

सीखः ब्रह्मांड का यह नियम है कि आप दूसरों को जो देते हैं -चाहे वह प्रेम हो, मदद हो या धन- वह आपके पास कई गुना होकर वापस लौटता है। यह वास्तविकता है कि जो तुमने दूसरों को दिया, वह वास्तव में बचत है और जो तुमने अपने पास रखा है, वह वास्तव में खो दिया है।

केवल ज्ञान या वस्तुएं ही नहीं, जितना सुख, प्रेम व ख़ुशियां तुम किसी को दोगे तुम्हें उससे दुगुनी हो कर मिलेंगी, लेकिन दुःख, घृणा व चिंताएं देने पर तुम्हें भी उन्हीं कष्टों को सहना पड़ेगा।

सरिता जैन 

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏


विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।  

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