Have a good company
अच्छी संगति करो।
Have a good company
अपनी संगति का चुनाव करने में सावधान रहो क्योंकि यह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से तुम पर बहुत प्रभाव डालेगी। गुणहीन, अपरिपक्व बुद्धि वाले और भौतिक दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्तियों के मेलजोल से बचो। केवल गिनती के मित्र बनाओ, जिन्हें तुमने समय-समय पर
विभिन्न परिस्थितियों में परख़ा हुआ हो और जो तुम्हारे अनुकूल हो और एक बार मित्रता करो तो उसे स्थिर रखने की कोशिश करो।
बार-बार मित्रता को तोड़ना अवयस्कता और अपरिपक्वता की निशानी है।
एक बार दो दोस्त रेगिस्तानी इलाके से गुज़र रहे थे। किसी बात पर दोनों में बहस छिड़ गई और पहले दोस्त ने दूसरे दोस्त को तमाचा मार दिया। दूसरा दोस्त सीधा ज़मीन पर बैठ गया और बालू पर लिखने लगा - ‘आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे तमाचा मारा।’ पहले दोस्त ने इसे पढ़ा, पर वह कुछ नहीं बोला। वे दोनों आगे चलने लगे। दो दिन
के बाद दोनों दोस्त एक तालाब में नहाने के लिए उतरे, अचानक दूसरे दोस्त का पाँव फिसल गया। पहले दोस्त ने दूसरे को डूबते देखा तो अपनी जान की परवाह न करते हुय वह पानी में कूद गया और उसे बचा लिएा। दूसरे दोस्त ने पत्थर पर खोद कर लिखा - ‘आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।’
पहले दोस्त को यह बालू और पत्थर पर लिखने का अन्तर समझ नहीं आया। उसके पूछने पर दूसरे दोस्त ने बताया कि अच्छे दोस्त की गलती को बालू पर लिखी पंक्ति की
तरह जल्द ही मन से मिटा देना चाहिए और अच्छे काम को पत्थर की लकीर की तरह सदा याद रखना चाहिए।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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