Maintain cleanliness and neatness in your surroundings.

 अपने चारों ओर सफाई व स्वच्छता रखो। 
Maintain cleanliness and neatness in your surroundings.

तुमने यह कहावत सुनी होगी- भगवत्ता के बाद स्वच्छता ही आती है। आपके वातावरण की स्वच्छता आप के मन की स्थिति पर गहरा प्रभाव डालती है। अपने कार्यालय का और घर का वातावरण पूर्णतया साफ़-सुथरा रखो। धूल को यहां वहां इकट्ठी मत होने दो। देखो कि नाली की निष्कासन प्रणाली व मल-मूत्र आदि की निष्कासन-प्रक्रिया तो ठीक है। सिस्टम में कहीं भी पानी का जमाव या भराव तो नहीं है।

जब कहीं कोई एसी दरार दिखाई दे तो संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने की तत्परता दिखाओ।

एक बार पति ने पत्नी से कहा - सुनती हो! 

पत्नी ने कहा - हाँ बोलिए! 

‘बड़ी जल्दी शुरू हो गई इस बार दिवाली की सफाई।’ 

‘हाँ! मैंने अभी से सफाई शुरू कर दी है। आपको क्या करना  है, बस! बैठे-बैठे लिखते रहते हैं। जब हमें अकेले ही करना है, तो धीरे-धीरे कर लेंगे।’ 

‘मगर करते समय जरा ध्यान रखना, वैसे तो सफाई तुम रोज ही घर में करती हो। शायद इस बार कबाड़ वगैरा में कहीं मेरी कोई किताब या कोई पुरानी डायरी ही मिल जाए। उसमें मेरी कुछ कविताएं होंगी, कुछ कहानियां होंगी। मै तो उनके बिना जितना लिख पा रहा हूँ, शायद उतना ही रह गया हूँ।’

‘हां! ठीक है, ध्यान रखूंगी। लेकिन मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि आपकी सारी डायरियां कलकत्ते ही रह गई हैं। सारी किताबें डायरिया वहाँ छोड़ कर आप अकेले ही वापस आए थे। वहीं सब रह गया था। साथ ही अच्छी खासी नौकरी भी वहीं छोड़ आए, उसे तो कभी नहीं खोजा।’

‘अरे भई! ठीक है, पर ध्यान रखने में क्या हर्ज है। पिछले आठ साल से हम दिवाली में घर की सफाई में सहयोग नहीं दे रहे हैं। इस बार दिवाली के समय ही शायद कुछ और भी कोई काम की चीज मिल जाए।’

‘अच्छा! अब आपको बोलने की ज़रूरत नहीं। इस बार मेरे साथ मेरी देवरानी भी है और वह आपसे कहीं ज्यादा समझदार है। वह इन सब बातों का पूरा ख्याल रखती है। और मैं तो हूँ ही। बस अब आप कम बोलो और अपने काम में ध्यान दो। साफ़-सफ़ाई का मैं ध्यान रख लूंगी।’

एक हफ्ते के बाद छत के कमरे की सफाई के समय वह बोली - ‘हां जी! देखो! आप ठीक कह रहे थे। एक तल्ले वाले कमरे में एक बोरी में बहुत से पुराने एलबम, आप की बहुत सारी डायरियां, किताबें मिली हैं। देखना हो तो देख लो।’

पति भाग कर छत पर गया और कुछ देर देखने के बाद, ‘यह मिल गया, इधर आओ देखो। अरे! सब फैला दिए... रुको! ये सब समेट कर आती हूँ।’ 

‘तुम बाकी सब छोड़ो... बाद में रख देना।’ 

‘क्या करना है?’

‘एक बार बैठो न!’

पति ने हाथ पकड़ कर वहीं बिठा लिया। 

‘अरे! क्या कर रहे हो? देवर देवरानी यहीं हैं।’

रहने दो... झूठ न बोलो.. यहां कोई नहीं है तुम्हारे और मेरे सिवा।’

‘अरे! ऐसा क्या मिला है, जो पागल हुए जा रहे हो?’ 

‘कुछ नहीं, बस ये डायरी, इसमें तुम पर लिखी ये कविताएं - आज का मिलन और तुम।’

‘न रोको मुझे, न टोको मुझे। बस देखो मुझे...

मैं आसमां में उड़ने वाला हूँ।......’

जो खजाना उन्हें पिछले आठ सालों से नहीं मिला था, वह उन्हें सफ़ाई करते हुए इस साल अनायास ही मिल गया था।

घर में या कार्यालय में समय-समय पर ऐसा रखा हुआ सामान दिखाई दे, तो उन पर ध्यान दो। प्रत्येक वस्तु को प्रयोग में लाने के बाद यथास्थान रख दो। प्रत्येक वस्तु को रखने का स्थान निश्चित होना चाहिए। केवल सामान की ही नहीं, तुम्हारे शरीर और कपड़ों की बाह्य सफ़ाई भी इसी प्रकार समान रूप से आवष्यक है। कुछ खाने के बाद या बाहर से घर आने पर अपना मुँह, नाक, आखें और चेहरे को

साफ़ करना, इसी दिशा में किया गया सार्थक प्रयत्न है। अपने घर में ताज़ी हवा आने दो और हवा की शुद्धता के लिए यदि आवष्यक हो तो समय-समय पर अगरबत्ती जलाओ औश्र घर के साथ-साथ अपने जीवन को भी सुगंधित बनाओ।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 



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