Choose appropriate colours.
उचित रंग चुनो।
रंग भी तुम्हारे मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उदाहरण के लिए हल्का नीला रंग मन पर शीतल प्रभाव डालता है। हरा रंग प्रेम का प्रतीक है। सफेद रंग पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रभाव उत्पन्न करता है। पीला रंग मन की ख़ुशी का प्रतीक है। काला रंग मन को उदासीनता, आलस और जड़ता से भर देता है, इसे प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन बातों को ध्यान में रख कर अपने कमरों, परदों, फर्नीचर, दरवाज़ों, खिड़कियों और अपने कपड़ों के लिए उचित रंग का चुनाव करना चाहिए।
एक बार एक राजा ने अपने तीन मंत्रियों की बुद्धिमानी परखने के लिए उन्हें बुलाया। राजा ने तीनों को एक-एक सफेद घोड़ा दिया और कहा, “जो इस घोड़े को सबसे अनोखे और उचित रंग में रंग कर लाएगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा।“
पहला मंत्री बाज़ार गया और सबसे महंगा सुनहरा रंग खरीदा। उसने घोड़े को सोने जैसा चमका दिया। उसे लगा कि राजा को भव्यता पसंद आएगी।
दूसरा मंत्री प्रकृति प्रेमी था। उसने घोड़े को गहरे हरे और नीले रंगों से सजाया, ताकि वह जंगल में ओझल हो सके। उसे लगा कि राजा को उपयोगिता पसंद आएगी।
तीसरा मंत्री शांत स्वभाव का था। वह कुछ दिन गायब रहा और फिर घोड़े को वैसे ही सफेद रंग का लेकर दरबार पहुँचा। लोग उसकी मूर्खता पर हंसने लगे।
राजा ने पहले मंत्री से पूछा, “सोना कीमती है, पर क्या घोड़ा अब दौड़ पाएगा?“ सोने की भारी परत के कारण घोड़ा थक चुका था।
राजा ने दूसरे से पूछा, “क्या यह रंग इसे सुरक्षित रखेगा?“ नहीं, वह रंग अप्राकृतिक लग रहा था।
जब राजा तीसरे मंत्री के पास पहुंचे, तो उसने कहा, महाराज! सादगी ही सबसे उचित रंग है। मैंने इसे किसी बनावटी रंग में नहीं रंगा, बल्कि इसे रोज़ नहलाकर इसकी प्राकृतिक सफेदी को निखारा है। सफेदी स्वच्छता और सत्य का प्रतीक है।“
राजा मुस्कुराए और बोले, “सत्य है कि सफेद ही सबसे उचित रंग है।“ उन्होंने तीसरे मंत्री को पुरस्कृत किया।
सीखः बाहरी चमक-धमक से बेहतर है कि हम अपने वास्तविक और स्वाभाविक गुणों को निखारें और अपने जीवन को सरल बनाने के लिए उचित रंग का चुनाव करें।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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