Temperature, humidity and noise have an effect on your mind.

 तापमान, उमस और आवाज़ तुम्हारे मन को प्रभावित करते हैं। 
 Temperature, humidity and noise have an effect on your mind.

तापमान, आर्द्रता और आवाज़ का एक संतुलित स्तर होता है, जिस पर तुम्हारा शरीर और मन सबसे अच्छी तरह काम कर सकता है।

उदाहरण के लिए तापमान का स्तर 20-25 डिग्री, आर्द्रता का 50 % व आवाज़ का आरामदाएक स्तर 45 डैसीबल है। इन संतुलित स्तरों का बदलाव शरीर और मन के संतुलन को अव्यवस्थित कर देता है और उसकी ताकत को कम कर देता है। 

राजा फिर वेताल को कंधे पर ले कर जंगल से चला। रास्ते में वेताल बोला- ’राजा, इतने वर्षों से तुम्हारे पूर्वज राजा  मुझे निडर हो कर ले जाते रहे हैं और आज उनके वंशज तुम फिर मुझे लेने आ गए। तुम्हारे वंशज चतुर ही नहीं बुद्धिमान् भी थे, आज तुम्हारी भी परीक्षा लेता हूँ। 

आज विश्व में जो कोविड-19 के कारण लाखों लोग मर रहे हैं और अनेक मौत के मुँह में जाने को हैं। छोटा क्या बड़ा क्या, अमीर क्या गरीब क्या, डॉक्टर क्या वैज्ञानिक क्या, नेता क्या अभिनेता क्या, दोषी-निर्दोषी सभी इस बीमारी से हताहत हो रहे हैं। मनुष्य ने ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया है, जो संसार के अधिकतर देश में इस महामारी का दंड भुगत रहे है? यदि तुमने इसका सही जवाब नहीं दिया तो तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे।

राजा थोड़ी देर चुप रहा. वेताल का जवाब उसने एक शब्द में दिया- ‘प्रदूषण और भ्रष्टाचार।’

वेताल बोला- ’वह कैसे राजा?’

राजा बोला- ’बचपन से ही बच्चे की जिद के कारण अभिलाषाएँ पूरी करने के साथ-साथ मनुष्य उसके मन में भ्रष्टाचार का बीजारोपण कर देता है। बच्चे झूठ बोलना, चोरी करना, मार-पीट करना आदि सीखने लगते हैं। बड़ा हो कर आडम्बर वाला जीवन मनुष्य को भ्रष्टाचार की ओर धकेलता है। जहाँ ग़रीब अपनी नौकरी या मजदूरी के लिए प्रलोभन का सहारा लेता है, सर्वोच्च शिखर पर बैठा मनुष्य शिखर पर बने रहने के लिए भ्रष्टाचार का सहारा लेता है। उसने प्रकृति तक को नहीं छोड़ा। अपना काम निकालने के लिए मनुष्य हर स्तर पर, हर क्षेत्र में अपनी पहचान, अपने सम्बन्धों, अपनी पहुँच की दुहाई दे कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। बढ़ते प्रदूषण और भ्रष्टाचार से आज मानव का व्यवहार ही मानव और प्रकृति दोनों का शत्रु बन गया है। यही कारण है आज विश्व जिस संक्रमण से गुज़र रहा है, यह व्यवहार ही मनुष्य के भ्रष्टाचार का मूल स्रोत है। 

इसलिए इस संक्रमण को निष्प्रभावी करने का निदान वर्तमान में सामाजिक दूरी के अतिरिक्त कुछ नहीं। इतने दिनों के लॉकडाउन से देख लें। प्रकृति का स्वरूप बदला है. जब तक भ्रष्टाचार है, इस प्रकार के वायरसों से प्रकृति अपना संतुलन बनाती रहेगी। कहावत भी है, गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है, इसलिए ’भ्रष्टाचार से दोषी-निर्दोष, बच्चे-बूढ़े सभी प्रभावित होते हैं। परिणाम स्वरूप आज सम्पूर्ण विश्व में मनुष्य कोविड-19 से ग्रसित होकर इसका दंड भुगत रहा है।

वेताल ने अट्टहास किया और बोला - ’राजा! तुमने चतुराई से अपनी जान बचा ली। मैं चला। वह छूट कर फिर पेड़ पर जा कर लटक गया.

अतः यदि कोविड-19 जैसे संक्रमण से बवने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ऊपर बताए गए तापमान के स्तर पर ही दिन का अधिकतम भाग बिताने की कोशिश करनी चाहिए।

इसकके साथ-साथ वातावरण का प्रदूषण भी तुम्हारे मन-मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालता है। 

प्रदूषित हवा की कार्बन-मोनोक्साइड शरीर की पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन ग्रहण करने की ताकत को कम करती है। खून में आक्सीजन की कमी दिमाग़ की और मन की क्रियाओं पर बुरा प्रभाव डालती है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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