Reduce your expectations.

  दूसरों से उम्मीद करना छोड़ दो।
Reduce your expectations from others.

किसी से भी किसी भी प्रकार की उम्मीद न करो। उदाहरण के लिए तुम्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि वह तुम्हारा पुत्र है, उसे तुम्हारे लिए यह करना चाहिए; वह तुम्हारा रिश्तेदार है अतः उसे तुम्हारे लिए वह करना चाहिए या तुमने उसके लिए इतना किया तो उसे भी कम से कम तुम्हारे लिए इतना तो करना ही चाहिए। 

उम्मीद का बोझ 

सुमित एक बहुत ही संवेदनशील और मददगार व्यक्ति था। वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से बहुत उम्मीदें रखता था। उसका मानना था कि अगर वह दूसरों की मदद करता है, तो मुसीबत में वे भी उसके लिए खड़े होंगे।

एक बार सुमित ने अपना एक बहुत ज़रूरी काम अपने सबसे करीबी दोस्त राहुल पर छोड़ दिया, यह सोचकर कि राहुल तो उसका अपना है, वह काम ज़रूर करेगा। सुमित ने खुद उस काम के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किया।

जब समय आया, तो पता चला कि राहुल ने वह काम किया ही नहीं। सुमित को बहुत नुकसान हुआ। वह टूट गया और उसने राहुल से कहा, “तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी।“

राहुल ने शांति से कहा, “सुमित, गलती मेरी नहीं, तुम्हारी है। तुमने मुझसे ’उम्मीद’ रखी। मैं भी एक इंसान हूँ, मेरी भी अपनी सीमाएं और प्राथमिकताएं हैं। यदि तुम अपना काम खुद करते, तो निराशा नहीं होती।“

सुमित को बात समझ आ गई। उस दिन उसने सीखा कि दूसरों से उम्मीद करना, अपने दुःखों को निमंत्रण देना है।

सीखः

उम्मीदें इंसान को कमजोर बनाती हैं, जबकि आत्मविश्वास (खुद पर भरोसा) इंसान को मजबूत बनाता है। दूसरों से कम और खुद से अधिक उम्मीदें रखने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। 

कृपया नोट करें कि किसी की सहायता करके तुम उन पर कोई अनुग्रह नहीं कर रहे। तुम केवल एक दैवीय काम कर रहे हो और यह अच्छा कर्म करके तुम केवल अपने आप

को सुधारने और पवित्र बनाने में अपनी सहायता कर रहे हो। अन्य लोगों ने एसा करने के लिए तुम्हें एक स्वणि्र्ाम अवसर दिया है।

जैसे ही किसी की सहायता करके तुमने बदले में पाने का विचार किया, तुमने इस पवित्र काम को एक व्यापारिक मोल भाव में बदल दिया और अपने काम से जुड़ा आदर्श खो दिया। तुमने केवल एक भौतिक माध्यम को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए चुना जब कि वास्तव में तुम्हारे द्वारा की गई सहायता भगवान के द्वारा ही की गई थी। याद रखो कि तुम्हारे द्वारा किया गया कोई अच्छा काम कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह किसी न किसी रूप में वापिस मिलता ही है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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