Don’t indulge in mad race of money.
धन की पागल दौड़ में आसक्त न बनो।Don’t indulge in mad race of money.
आजकल यह देखने में आता है कि लोग चाहे किसी भी तरीके से अधिक से अधिक पैसा कमाने की पागल दौड़ में लीन हो रहे हैं। यह उनके लिए एक प्रकार का नशा बन गया है। वे केवल अपने धन को बढ़ाने में लगे हुए हैं, बिना यह जाने कि उन्हें इस की आवश्यकता है या नहीं और इस का कोई अन्त है या नहीं। वे अपने ही जाल में फंस कर रह
जाते हैं और अपनी अन्तिम सांस के साथ ही आज़ाद होते हैं और मरणोपरांत उनके उत्तराधिकारियों में इस धन संपत्ति के विशाल भण्डार को हड़पने के लिए एक नई दौड़ आरम्भ हो जाती है। तब पता चलता है कि मरने वाले ने अपना समय धन का मज़ा लेने के स्थान पर उसको कमाने में ही अधिक बिताया था।
धन की पागल दौड़ - लघुकथा
रामदीन गाँव का सबसे मेहनती किसान था, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा शहर जाकर करोड़पति बनने के सपने तैरते रहते थे। खेत से अच्छी आमदनी होने के बावजूद वह उसे कम समझता था।
“यह खेती-बाड़ी छोटी सोच है। मुझे तो बड़ा आदमी बनना है।“ वह अक्सर कहता।
शहर में उसके एक दूर के रिश्तेदार ने उसे एक ऐसे व्यापार का लालच दिया, जहाँ रातों-रात पैसा दोगुना हो रहा था। रामदीन ने अपने खेत, घर के गहने सब बेचकर शहर की ’धन की पागल दौड़’ में झोंक दिया। शुरुआत में फायदा हुआ, तो उसका लालच और बढ़ गया। उसने कर्ज लेकर और भी ज्यादा निवेश कर दिया।
परंतु यह सब एक बुलबुला था। अचानक बाज़ार गिरा और कंपनी रातों-रात गायब हो गई।
रामदीन दाने-दाने को मोहताज हो गया। उसके पास न रहने को घर था, न खेती के लिए खेत। उसने जो कमाया था, वह तो गया ही, साथ ही परिवार का चैन और मानसिक शांति भी वह उस पागल दौड़ में हार गया।
एक दिन खाली हाथ गाँव वापस लौटते हुए उसने अपने पुराने पड़ोसी श्यामू को अपने छोटे से खेत में मुस्कुराते हुए काम करते देखा। श्यामू के पास बहुत ज्यादा धन नहीं था, लेकिन वह खुश और संतुष्ट था।
रामदीन को समझ आ गया कि “धन ही सब कुछ नहीं है और लालच की दौड़ का अंत हमेशा विनाश होता है।“
सीख -
ज़रूरत से ज्यादा धन की अंधी दौड़ में इंसान जो पास में है, उसे भी खो देता है। संतोष ही सबसे बड़ा धन है।
यह उचित ही कहा गया है कि एक सीमा के बाद मन का उपयोग केवल और अधिक धन कमाने में और अपनी इच्छाओं को बढ़ाने में ही होता है। यदि आप ख़ुश रहना चाहते हो तो इस अच्छी तरह से अनुभव व परीक्षित की गई कहावत को याद रखें कि धन तुम्हें शाश्वत ख़ुशी के सिवा सब कुछ दे सकता है।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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