Don’t be too anxious to know your future.
अपने भविष्य को जानने के लिए बहुत अधिक उत्सुक न हों।Don’t be too anxious to know your future.
कुछ लोग अपना बहुत सा समय ज्योतिषियों, भविष्यवक्ताओं से मिलने में व्यर्थ गवां देते हैं, केवल यह जानने के लिए कि भविष्य में उनके लिए वास्तव में क्या इकट्ठा किया गया है। इस संबंध में दो बातें नोट करो। पहली यह कि तुम्हारी किस्मत या भविष्य कुछ ऐसा नहीं है कि जो एकदम ठोस रूप से निश्चित है। कोई भविष्यवक्ता पूरे विश्वास से नहीं कह सकता कि जो वह कह रहा है वह 100% सच है। वह विभिन्न संभावनाओं का अच्छे से अच्छा संकेत दे सकता है लेकिन तुम्हारा भविष्य या भाग्य कुछ हद तक परिवर्तनशील है जो विभिन्न वस्तुओं पर निर्भर करता है। कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं जो अपने प्रयत्नों द्वारा अपने पुराने भाग्य को पूर्णतया बदल देते हैं और अपने लिए पूरी तरह एक नए भाग्य का निर्माण करते हैं। अन्य शब्दों में- वे अपने भाग्य का
नियंत्रण अपने हाथों में रखते हैं।
भविष्य का बोझ
एक बार एक प्रसिद्ध संत अपने शिष्यों के साथ नदी के किनारे टहल रहे थे। तभी एक धनी व्यापारी वहां रोता हुआ आया और बोला, “महाराज! मैं भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूँ। अगर अगले साल मेरा व्यवसाय ठप हो गया तो? अगर मेरे परिवार पर कोई विपत्ति आ गई तो?“
संत मुस्कुराए और उन्होंने व्यापारी को एक छोटा लेकिन भारी पत्थर उठाने को कहा। व्यापारी ने पत्थर उठा लिया।
संत बोले, “इसे हाथ में ही रखना।“
कुछ देर तक तो व्यापारी ने पत्थर उठाए रखा, फिर हाथ दुःखने लगा। वह पत्थर नीचे रखना चाहता था, लेकिन संत ने मना कर दिया। अंततः हाथ की पीड़ा असहनीय हो गई और व्यापारी चिल्लाया, “महाराज! यह भारी पत्थर मैं कब तक उठा कर रखूँ? मेरा हाथ टूट जाएगा!“
संत ने शांत भाव से कहा, “बस! यही तुम्हारे भविष्य की चिंता का उत्तर है। जब तक तुम इस पत्थर को थोड़े समय के लिए उठाते हो, यह सहनीय है। लेकिन अगर तुम इसे पूरा दिन या जीवन भर उठाए रखोगे, तो यह तुम्हें अपंग बना देगा।“
व्यापारी ने पत्थर नीचे रख दिया और उसे समझ आ गया कि भविष्य के बारे में “उत्सुक“ (Over anxious) होना उसे अभी के ’वर्तमान’ से दूर ले जा रहा है।
सीखः भविष्य की चिंता करना एक बोझ के समान है, जो आपके आज की सुख-शांति को नष्ट कर देता है। भविष्य की योजना बनाएं, लेकिन उसकी चिंता में वर्तमान को बर्बाद न करें।
दूसरी बात यह है कि यदि तुम अपने पूर्व नियत भविष्य में विश्वास रखते हो, तो जो कुछ भी तुम अपने भाग्य के बारे में जानते हो उसे बदल नहीं सकते। तुम बस अपने भाग्य को दुःखी बना लोगे और अनावश्यक उत्तेजनाओं और तनावों को उसमें जोड़ लोगे। क्योंकि यह निश्चित है कि भविष्य में कोई भी घटना ऐसे घटित नहीं होगी, जैसे तुम चाहते हो। कुछ
विपरीत घटनाएं न केवल तुम्हारे जीवन में बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ घटित होती हैं, क्योंकि जीवन ग़म और ख़ुशी का मिश्रण है। वास्तव में कुछ विशेष घटनाओं के घटित होने के प्रति लगातार उत्तेजना और डर रखने से, हम उस भविष्यवाणी को ‘भौतिक आकर्षण’ के नियम द्वारा स्वयमेव ही पूरा होने देते हैं, चाहे उस घटना को होना ही न हो।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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