Don’t waste any thing.
व्यर्थ न करो, उपयोग करो Don’t waste any thing.
राहुल को हर नई चीज़ खरीदने की आदत थी। स्कूल बैग, पेंसिल बॉक्स, खिलौने - सब कुछ महीने भर में पुराना हो जाता और वह नया माँगता। उसके माता-पिता अक्सर समझाते, “बेटा, चीज़ों को व्यर्थ मत करो, उनका सदुपयोग करो।“ पर राहुल अनसुनी कर देता।
एक दिन, स्कूल में एक ‘वेस्ट-टू-बेस्ट’ (कबाड़ से जुगाड़) प्रतियोगिता थी। राहुल ने सोचा था कि वह नई रंगीन शीटें खरीदकर लाएगा, लेकिन उस दिन उसके पिता ने जेब खर्च देने से मना कर दिया और कहा, “पुरानी चीज़ों का उपयोग करके देखो।”
राहुल परेशान हो गया। उसने घर में देखा, कोनों में पुराने बक्से, टूटे खिलौने और बेकार पड़े कार्टून में सामान भरा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। तब उसकी माँ ने मदद की। उन्होंने पुराने अखबारों को मोड़कर टोकरी बनाना, प्लास्टिक की बोतलों को काटकर पेन स्टैंड बनाना और फटे हुए चार्ट पेपर से कोलाज बनाना सिखाया।
प्रतियोगिता के दिन, राहुल का बनाया हुआ ’प्लास्टिक बोतल पेन स्टैंड’ सबसे अनोखा था। शिक्षकों ने उसे प्रथम पुरस्कार दिया। राहुल को समझ आ गया कि जो वस्तु उसे ’व्यर्थ’ लग रही थी, वास्तव में वह अनमोल थी।
उस दिन के बाद, राहुल ने कभी भी किसी वस्तु को व्यर्थ नहीं फेंका।
शिक्षाः वस्तु को व्यर्थ न होने दें; हर बेकार वस्तु का पुनर्चक्रण (recycle) करके उसे उपयोग के योग्य बनाया जा सकता है।
यह विनाश खाने की वस्तुओं, कागज़, पानी या बिजली का भी हो सकता है। जैसे जब तुम पानी के नल से पानी को व्यर्थ बहता हुआ देखते हो या अनावश्यक रूप से बिजली जलती हुई पाते हो तो उसे बंद करने की चेतना का विकास करो। ऐसी बातों को अनदेखा करना व सोचना कि यह तो देश का नुकसान है, मेरा अपना नहीं, एक विकसित दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित नहीं करता। इस प्रकार की भावना तुम्हें और तुम्हारे देश को नीचे की ओर ले जाती है।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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