Do regular exercise.

प्रतिदिन व्यायाम करो। 
Do regular exercise.

लगातार स्ट्रैचिंग और एरोबिक व्यायाम तनाव और नसों की जकड़न को ढीला करते हैं और इस प्रकार नसों को आराम मिलता है। यह शारीरिक विश्राम मानसिक शान्ति की ओर ले जाता है क्योंकि शरीर और मस्तिष्क अन्दर से जुड़े हुए हैं। तीव्र गति से किया गया एरोबिक व्यायाम तुम्हारे फेफड़ों और दिल को मजबूत बनाता है और तुम्हारी सामान्य शक्ति व प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। 

एक छोटा सा गाँव था, जहाँ आलसीराम नाम का एक लड़का रहता था। जैसा उसका नाम था, वैसा ही उसका काम -दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना और जंक फूड खाना।

उसके दादाजी, जो 80 की उम्र में भी एकदम चुस्त थे, उसे हमेशा समझाते, ‘बेटा, शरीर एक मशीन की तरह है। इसे जितना चलाओगे, यह उतना ही बेहतर चलेगा।ष्8पर आलसपुर उनकी बातों को हँसकर टाल देता।

एक दिन गाँव में ‘दौड़ प्रतियोगिता’ का आयोजन हुआ। प्रथम पुरस्कार एक चमचमाती साइकिल थी। आलसीराम को साइकिल बहुत पसंद थी। उसने सोचा, ‘दौड़ना ही तो है, मैं तो तेज दौड़कर जीत जाऊँगा।’

जैसे ही दौड़ शुरू हुई, आलसीराम ने पूरी ताकत लगाई। लेकिन मात्र 100 मीटर दौड़ते ही उसकी साँस फूलने लगी, पैरों में दर्द होने लगा और वह बीच रास्ते में ही बैठ गया। उसने देखा कि उससे उम्र में बड़े और छोटे बच्चे आसानी से आगे निकल गए।

वह हारकर घर लौटा और उदास होकर बैठ गया। दादाजी उसके पास आए और बोले, ‘हार का कारण कमजोरी नहीं, अभ्यास की कमी है। लोहा रखे-रखे जंग खा जाता है, वैसे ही शरीर भी बिना व्यायाम के कमजोर हो जाता है।’

उस दिन आलसीराम ने ठान लिया कि वह अपनी जीवनशैली बदलेगा। उसने अगले ही दिन से रोज व्यायाम करना शुरू किया। शुरुआत में मुश्किल हुई, पर धीरे-धीरे उसे आनंद आने लगा। कुछ ही महीनों में उसका आलस्य दूर हो गया और वह ऊर्जा से भर गया।

अगले वर्ष जब वही प्रतियोगिता हुई, तो आलसीराम न केवल दौड़ा, बल्कि सबसे आगे रहकर विजेता बना।

सीख- स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ी पूंजी है, और इसे पाने का एकमात्र रास्ता नियमित व्यायाम है।

अतः शारीरिक व्यायाम, जॉगिंग,सैर और योगासन को दिनचर्या का अंग बनाओ। व्यायाम और प्राणायाम तुम्हारे मन-मस्तिष्क को शांत, स्थिर और संतुलित बनाता है।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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