Give the world more

 जितना तुमने संसार से लिया है, उससे ज़्यादा दो।

Give the world more than what you take from it.


पृथ्वी पर रहते हुए तुम बहुत सी वस्तुएं या लाभ अपने परिवार, पूर्वजों, समाज, देश, दुनिया और प्रकृति (हवा, पानी, धूप और धरती माता) से प्राप्त कर रहे हो। इस पृथ्वी पर तुम्हारा जीवन केवल तभी कीमती माना जाएगा, जब तुम दुनिया को उससे ज़्यादा दोगे, जितना तुमने संसार से लिया है। ‘संसार से जितना लिया है, उससे अधिक दो’ के मूल भाव पर आधारित लघुकथा-

 अनमोल विरासत 

एक वृद्ध व्यक्ति अपने अंतिम दिनों में एक बगीचा लगा रहा था। पड़ोसी ने पूछा, “बाबा, आपकी उम्र में फल का पेड़ लगाने का क्या फायदा? यह कब बड़ा होगा और कब आप फल खाएंगे?“

वृद्ध ने मुस्कुराकर कहा, “मैंने अपने पूरे जीवन में इस जमीन से फल, फूल और छाया ली है। जितना मैंने इस प्रकृति से लिया, क्या उतना ही वापस देना काफी है? मैं तो यहाँ और अधिक देने की उम्मीद से यह पेड़ लगा रहा हूँ। यह फल मैं नहीं, तो आने वाली पीढ़ी खाएगी।“

वृद्ध की आंखें संतुष्टि से चमक रही थीं। उसने संसार से केवल लिया नहीं, बल्कि लौटते हुए भी उससे अधिक दिया।

सीखः हमें दुनिया को उससे बेहतर जगह बनाना चाहिए, जैसा हमने उसे पाया था। 

यदि तुम समाज को उचित लाभ दियेे बिना केवल एक परजीवी की तरह उससे लगातार पोषण पाते हो, तो तुम इस धरती पर केवल बोझ हो। तुम समाज को उसके लाभ के लिए कई प्रकार से अपने ज्ञान व अनुभव को बांट कर, अपने ज्ञान पर आधारित कुछ क्रियात्मक कार्य करके कुछ न कुछ अवश्य दे सकते हो।

द्वारा--सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद। 

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