Include rest in your routine
अपनी दिनचर्या में आराम को शामिल करो। Include rest and relaxation
phases in your routine
तुम्हारा दैनिक कार्य कलाप आराम के उचित अन्तराल से संतुलित होना चाहिए। यह संतुलन बिगड़ गया तो काम के घंटे बढ़ने की बजाय तुम्हारी ताकत कम हो जाएगी और तुम्हें कम परिणाम मिलेगा। विश्राम से तुम्हारे शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है। शरीर के प्रत्येक भाग को थोड़ा हिलाकर और खींचने के बाद समतल बिस्तर पर या फ़र्श पर शवासन में लेटने से तुम्हें शारीरिक आराम मिल सकता है।
धनुष की डोर
एक शहर में आर्यन नाम का एक बहुत ही प्रतिभाशाली युवक रहता था। वह अपनी सफलता को लेकर इतना जुनूनी था कि दिन-रात काम करता था। उसे लगता था कि आराम करना समय की बर्बादी है और वह अपनी सेहत पर ध्यान दिए बिना कड़ी मेहनत करता रहा।
कुछ ही समय में आर्यन को सफलता तो मिली, लेकिन वह बहुत चिड़चिड़ा और थका हुआ रहने लगा। उसकी उत्पादकता (productivity) घटने लगी और काम में गलतियां होने लगीं।
परेशान होकर वह अपने दादाजी के पास गया, जो एक अनुभवी तीरंदाज थे। उसने अपनी समस्या बताई। दादाजी ने आर्यन को अपना पुराना धनुष दिखाया और उसकी डोर को ढीला कर दिया।
दादाजी ने कहा, ‘आर्यन, इस धनुष से तीर चलाओ।’
आर्यन ने कोशिश की, लेकिन डोर ढीली होने के कारण तीर ज्यादा दूर नहीं गया।
अब दादाजी ने कहा, ‘अब मैं इस डोर को बहुत ज्यादा टाइट (tight) कर देता हूँ, अब चलाओ।’
आर्यन ने फिर कोशिश की, लेकिन इस बार डोर इतनी कसी हुई थी कि वह खींच ही नहीं पाया, और डर था कि कहीं डोर टूट न जाए।
दादाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बेटा, जीवन भी इसी धनुष की तरह है। यदि तुम हमेशा काम में लगे रहोगे और कभी आराम नहीं करोगे, तो इस बहुत कसी हुई डोर की तरह टूट जाओगे (मानसिक या शारीरिक रूप से बीमार हो जाओगे) और अगर कुछ नहीं करोगे तो इस ढीली डोर की तरह बेअसर हो जाओगे।’
दादाजी ने समझाया, ‘सफलता के लिए आराम (break) और काम का संतुलन आवश्यक है। आराम करने से शरीर को फिर से ऊर्जा मिलती है, जिससे तुम ज्यादा मजबूती और सटीकता से काम कर पाओगे।’
आर्यन को अपनी गलती समझ आ गई। उस दिन से उसने अपने काम के साथ-साथ आराम को भी उतना ही महत्व दिया, जिससे वह पहले से ज्यादा सफल और खुशहाल बन गया।
सीख - जीवन में लगातार काम करना ही सफलता नहीं है, बल्कि समय-समय पर लिया गया आराम उत्पादकता और मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है।
मानसिक आराम गहरे सांस लेने पर, अनुलोम-विलोम करने पर या किसी मंत्र पर ध्यान केन्द्रित करने से मिलता है। यह हज़ारों विचारों को स्थिर करने में मदद करता है, जो मन में प्रतिक्षण उठते रहते हैं।
वास्तविक विश्राम में तुम अपने शरीर और चारों तरफ की वस्तुओं को भूल जाते हो ताकि अपने कार्यों के बीच के विभिन्न अन्तरालों पर लिए गए इस चेतनता युक्त विश्राम से तुम काम करने की नई शक्ति ग्रहण कर सको।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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