Don't leave your mind idol
अपने मन को निकम्मा मत छोड़ो, उसके सामने हमेशा कुछ लक्ष्य रखो। Don't leave your mind idol .keep always some goals before it
कुछ लोग अपने जीवन का समय ऐसे बिताते हैं जैसे उन्हें किसी भी तरह समय काटना है न कि जीवन का आनन्द लेना है। सोचने का ऐसा ढंग यह दर्शाता है कि उनका उद्देश्य केवल एक दिन ‘मरना’ है। लेकिन हमें यह अवश्य समझना चाहिए कि यह जीवन बहुत मूल्यवान है। यह व्यर्थ के और उद्देश्य रहित कामों में नष्ट करने के लिए हमें नहीं दिया गया। हम पृथ्वी पर छुट्टियां बिताने नहीं आए हैं। हमें यहां कोई उद्देश्य प्राप्त करना है।
एक समय की बात है, एक व्यक्ति को एक सिद्ध महात्मा से एक जादुई जिन्न मिला। जिन्न की एक ही शर्त थी: "मुझे हर समय काम चाहिए। अगर तुम मुझे खाली छोड़ोगे, तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा।"
शुरू में वह व्यक्ति बहुत खुश हुआ। उसने जिन्न से आलीशान महल, धन-दौलत और बढ़िया खाना माँगा। जिन्न ने पलक झपकते ही सब कुछ हाजिर कर दिया। लेकिन जल्द ही वह व्यक्ति घबरा गया, क्योंकि जिन्न का हर काम खत्म होते ही वह सामने आकर खड़ा हो जाता और कहता, "मालिक, अगला काम बताओ वरना मैं तुम्हें खा जाऊंगा!"
घबराया हुआ व्यक्ति महात्मा के पास पहुँचा। महात्मा मुस्कुराए और बोले, "बाहर आँगन में एक खंभा गड़वा दो। जिन्न से कहना कि जब उसके पास कोई काम न हो, तो वह उस खंभे पर ऊपर चढ़े और नीचे उतरे।"
जैसे ही व्यक्ति ने ऐसा किया, जिन्न उलझ गया। जब मालिक काम देता, वह उसे पूरा करता और खाली समय में खंभे पर ऊपर-नीचे चढ़ता रहता। इस तरह व्यक्ति की जान भी बच गई और उसका काम भी होता रहा।
सीख: हमारा मन भी उसी जिन्न की तरह है। यदि इसे सकारात्मक लक्ष्यों (खंभे) में नहीं लगाया गया, तो यह नकारात्मक विचारों से हमें ही नष्ट करने लगेगा। इसलिए अपने मन को हमेशा किसी न किसी लक्ष्य में व्यस्त रखें ताकि वह आपका गुलाम बना रहे, मालिक नहीं।
उद्देश्य रहित जीवन यापन करना ऐसा ही है, जैसे मैदान में यहां वहां फुटबॉल को ठोकर मारना, जिसका उद्देश्य दूसरी टीम के गोल की तरफ गेंद को पहुँचाना नहीं है। तुम्हें अपने व्यावसायिक जीवन के साथ-साथ निजी जीवन में भी कुछ छोटी अवधि के और कुछ बड़ी अवधि के लक्ष्य बनाने चाहिएं और सीढ़ी दर सीढ़ी क्रम के अनुसार उन्हें प्राप्त करने के लिए काम करना चाहिए। ये सब कम अवधि के लक्ष्य और लम्बी अवधि के लक्ष्य अन्त में एक बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने का आधार बनेंगे जो है आत्म-अनुभूति (self-realization)एक दिशा विहीन मन सामान्यतया अपनी निम्न प्रकृति ;स्वभावद्ध के अधीन हो जाता है और कई तरह के पापों और असभ्य प्रवृतियों में लीन हो जाता है।
द्वारा--सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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